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डा. कठेरिया के नेतृत्व में वर्धा शहर के मोबाइल यूजरों पर हुआ शोध

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मेमोरी लॉस के शिकार हो रहे मोबाइल उपभोक्ता, मानवीय व्यवहार में बदलाव का कारण बन रहे मोबाइल करीब 80 प्रतिशत लोगों का मानना है कि मोबाइल उपयोग करने से समाज में अपराधिक घटनाओं में वृद्धि हो रही है। अपराधिक घटनाओं के षड़यंत्र रचने में मोबाइल तकनीक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है यह प्रतिशत तेजी से बढ़ा है। वहीं 60 प्रतिशत लोगों का मानना है कि मोबाइल क्रांति से सामाजिक सशक्तिकरण की गति भी तेज हुई है।  स्वास्थ्य मंत्रालाय द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में विभिन्न मंत्रालयों की समिति आईएमसी ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा था कि मोबाइल मानव शरीर पर कई हानिकारक प्रभाव डाल रहा हैं।  डॉ. धरवेश कठेरिया वर्धा, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के संचार एवं मीडिया अध्ययन केंद्र के सहायक प्रोफेसर डा. धरवेश कठेरिया के नेतृत्व में वर्धा शहर के प्रतिभागियों पर ‘मोबाइल उपयोगकर्ता का मानवीय व्यवहार पर प्रभाव’ विषय पर किए गए शोध में कई आंकड़े चैंकाने वाले सामने आए। शोध के मुताबिक मोबाइल मानवीय व्यवहार में बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण कारण बन रहा है। मोबाइल का ज्यादा उपयोग करने वाले लोग...

डाॅ. अर्जुन तिवारी जी का साक्षात्‍कार।

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डाॅ. अर्जुन तिवारी जी का साक्षात्‍कार। भडास पर देखने के लिए क्लिक करें।  http://bhadas4media.com/interview/7133-arjun-tiwari डॉ. अर्जुन तिवारी  भारत में पत्रकारिता शिक्षा की नींव और पत्रकारिता शिक्षा को दिशा देने में डॉ. अर्जुन तिवारी की भूमिका महत्वपर्ण रही है। सही मायने में इन्हें पत्रकारिता गुरु कहा जाय तो गलत नहीं होगा। ‘‘हिन्दी पत्रकारिता का उदभव और विकास’’ पर पीएच.डी. करने के बाद इन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब तक पत्रकारिता की 20 से ज्यादा पुस्तकें लिखने वाले डॉ. तिवारी को नामित पुरस्कार, सम्पादन पदक, बाबूराव विष्णु पराड़कर पुरस्कार और पत्रकारिता-भूषण साहित्य गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। हाल में उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान ने उन्हें तीन अगस्त 2015 को लोक साहित्य में महापंडित राहुल सांकृत्यान’’ पुरस्कार देने की घोषणा की है। यह पुरस्कार 14 सितंबर को दिया जाएगा। डॉ. अर्जुन तिवारी भाटपाररानी, देवरिया के मूल निवासी हैं। 1965 में भाटपाररानी से शैक्षणिक कार्य की शुरुआत की। इसके बाद 1994 में काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष हुए और 2002 में से...

विश्‍व हिन्‍दी सम्‍मेलन

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एक नजर विश्‍व हिन्‍दी सम्‍मेलन के आंकडों पर ... विश्‍व हिन्‍दी सम्‍मेलन भारत में नागपुर,दिल्‍ली के बाद भोपाल में दसवां विश्‍व हिन्‍दी सम्‍मेलन का अयोजन किया गया। किसी ने इसे संघ का सम्‍मेलन बताया तो किसी ने इसे साहित्‍य से परे बताया। सूत्रों से मिली खबर के अनुसार विभिन्‍न विश्‍वविद्यालयों से आए छात्र छात्राओं ने हिन्‍दी सम्‍मेलन का आनंद उठाते हुए एक छात्रों ने तीन दिन में औसतन 1264 तस्‍वीर खींचवाएं हैं। विद्यार्थियों के साथ साथ शिक्षकों पर गौर करें तो ये आंकडे और भी चौकाने वा ले हैं। औसतन एक शिक्षक ने तीन दिनों के सम्‍मेलन में 834 तस्‍वीर खींचवाया है।  मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री श्री शिवराज सिंह के साथ तीन दिनों में 2600 लोगों ने फोटो खींचवाया है। हिन्‍दी की रोटी बेलने वालों की उपस्थिति अच्‍छी खासी रही और हिन्‍दी भााषा की रोटी खाने वाले नदारत रहे।   विश्‍व हिन्‍दी सम्‍मेलन में हिन्‍दी को इज्‍जत दिलाने के लिए गए बडे साहित्‍यकार झोला न मिलेने पर नाराजगी दिखाई और कहा कि यह हिन्‍दी सम्‍मेलन नहीं झोला सम्‍मेलन है।   कई लोगों ने तारीफों के पुल बांधते हुए हिन्‍दी स...

आकर्षण का केंद्र है पोर्न …

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आकर्षण का केंद्र है पोर्न …  पोर्न का इतिहास सदियों पुराना है। जब देश में आधुनिक तकनीक का आगमन नहीं हआ था तो राजा, महाराजा कलाकृतियों के माध्यम से पोर्न का आनंद लिया करते थे। राजाओं के पास हजारों रानियां रहती थी फिर भी कलाकृतियों को देखकर वासना की भूख मिटाता था। वर्तमान समय में आधुनिक तकनीक ने पोर्न को घर घर तक पहुंचा दिया है। कुछ बुद्धिजीवी लोगों का मानना है कि बलात्कार के पीछे पोर्न का हाथ है। आंकडो पर गौर करें तो भारत में 50% इंटरनेट यूजर पोर्न देखते हैं। अगर पोर्न ही बलात ्कर के लिए प्रेरित करता है तो मेरा मानना है भारत के प्रत्येक घर में एक बलात्कारी है। कुछ मामलों में पोर्न का हाथ हो सकता है लेकिन सभी मामलों में पोर्न वेबसाइट का हाथ बताकर अपनी आत्मा को शांति देना है। पोर्न देखने वाले भारत के 50%लोग पोर्न देखकर खुद को संतुष्ट कर लेता है और कई बडे सामाजिक अपराध से भी देश को बचाता है। पोर्न देखने वालों में ज्यादातर युवा हैं।  सेक्स शिक्षा से जुडे कानून बनाने वाले ‘सिओन हमफ्रेज’ ने कहा है … ‘’आज के बच्चे ऐसी दुनियां में हैं जहां सेक्स एक खुला विषय है। उन्हें बताया ...

बिहार में विकास नहीं जाति को मिलेगा बोट ...

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बिहार में विकास नहीं जाति को मिलेगा बोट ... बिहार में चुनाव से पहले सियासी घमासान तेज हो गया है। कोई जाति की राजनीति करेगा तो कोई विकास की, कोई भगवा लहराएगा तो कोई सांप्रदायिक ताकत को जड से उखाडने की बात करेगा, किसी को दलितों की चिंता होगी तो किसी को सवर्णों की। फिलहाल बिहारी राजनीति में झाडू का आना बांकी है जो पूरे बिहार को लोकपाल के माध्यम से व्यवस्थित कर देगा। सत्ता का सुख किसे नहीं चाहिए। फिर भी चुनावों में कोई त्याग कर रहा है तो कोई बिहार बचाने के लिए जहर पी रहा है। कभी  जंगल राज की दुहाई देने वाले आज जंगल में ही मंगल कर रहे हैं तो कभी दलितों के हित की लडाई लडने वाले जीतन राम मांक्षी भी आज बीजेपी की गोद में समा गए हैं। आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा, राजद, कांग्रेस, बसपा और जदयू के अलावा जीतन राम मांझी की हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा, सांसद पप्पू यादव की नई पार्टी जनाधिकार मोर्चा और पूर्व सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री नागमणि की समरस पार्टी, उपेन्द्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी और रामविलास की लोजपा सहित वामदल भी इस चुनावी समर में ताल ठोंकने की तैयारी में जुट...

अलविदा इंदौर...

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अलविदा इंदौर.. इंदौर आया भी था तो बारिश की बूंदों ने स्वागत किया था...मन अजीब सा हो रहा था लेकिन समय बीतता गया और मैं भी इंदौर की दुनिया में रमता चला गया ।             एम.फिल. की पढ़ाई के दौरान बहुत सी नई अनुभवों को सीखा... आज इंदौर को अलविदा करने का समय आ गया है... यहां अध्यापन से लेकर शैक्षणिक गतिविधियों की बारीकियों को सीखने का मौका मिला... यहां अध्यापन के दौरान अपने छात्र-छात्राओं से भी बहुत कुछ नया सीखने को मिला । मित्रों एवं गुरुजनों का सहयोग मिलता रहा जिसके लिए मैं सबका शुक्रगुजार हूँ...                                                                                                 आज से इंदौर की जीवंतता मेरी यादों में खो जाएगी...                      ...
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अतिथि व्‍याख्‍याता- पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्‍ययनशाला,इन्‍दौर। D.A.V.V.

भाजपा में शामिल हुई किरण बेदी।

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किरण बेदी के बीजेपी में जुडने से कुछ लोग खासा नाराज हैं तो कुछ लोग अपनी भडास सोशल मीडिया पर निकाल रहे हैं। कहा जाता है बहती गंगा में कौन हाथ नहीं धोना चाहता है। जब हमलोग हिन्‍दू से मुस्लिम, मुस्लिम से हिन्‍दू, सिक्‍ख,ईसाई बन सकते हैं तो किरण बेदी बीजेपी में शामिल क्‍यों नहीं हो सकती है? किसी की धर वापसी होती है, किसी को पार्टी ज्‍वाईन करने से देश सेवा करने का मोका मिलता है। ऐसे भी कहा जात है राजन ीति और राजनेता का कोई धर्म नहीं होता है। फिर भी किरण बेदी को लेकर कई सवाल हैं। दूध के धुले कोई भी लोग राजनीति में नहीं है जो यह कह सकते हैं कि मैं पूरी तरह से पाक हूं। राजनीति में आरोप का साथ चोली अौर दामन का है।  कहा जाता है समय के साथ भाई-बहन,पति-पत्‍नी,भाई-भाई ,बाप-बेटा का रिश्‍ता बदल जाता है, किरण बेदी ने तो पार्टी का पाला बदला है। जिस तरह से बुखार के लिए अलग,खांसी के लिए अलग दबा की जरूरत होती है ठीक उसी तरह से किरण बेदी को आज नरेन्‍द्र मोदी के दबा की जरूरत है जिसके माध्‍यम से वह दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री तक की यात्रा सफर कर सकती है। मेरा मानना है कोई भी राजनेता जनता के लिए नहीं ब...

अाॅस्ट्रेलिया दौरे पर भारत की स्थिती नाजुक

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अाॅस्ट्रेलिया दौरे पर भारत की नाजुक स्थित को देखते हुए बीसीसीआई ने लिया कडा फैसला।  भारतीय राजनीति के भविष्य और कांग्रेस पार्टी की देशभर से हो रहे सफाई को देखते हुए नरेन्द्र मोदी को भारतीय टीम का कप्तान और अमित शाह को उपकप्तान घोषित किया गया है।   इसपर अाॅस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने आपत्ति जताया और कहा कि अाॅस्ट्रेलिया 11 खिलाडियों के स्थान पर मोदी के खिलाफ अपने 22 खिलाडियों को उतारेगा।
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                                                                     Niranjan Kumar 

पूरा शहर कर रहा चित्‍कार।

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पूरा शहर कर रहा चित्‍कार।  मिनी मुंबई और व्‍यवसायिक नगरी के नाम से जाना जानेवाला, मध्‍यप्रदेश का आधुनिक शहर इन्‍दौर, दीपावली के अवसर पर खामोश हो गया है। खामोशी भी ऐसी कि एक दूसरे की चीख पूकार सुनाई न दे। शहर के लगभग मकानों में ताले लगे हैं। अपने आप पर इतराता हुआ शहर आज ऐसा लग रहा है जैसे रो रो कर अपनों को वापस बुला रहा हो लेकिन आज इसका कोई नहीं सुन रहा है।सभी लोग शहर छोडकर गांव की ओर जा रहे हैं। ट्रैफिक जाम नहीं है,गाडियों के हार्न सुनाई नहीं पड रहे हैं, अब लडकियों को उपर से नीचे तक घुरने वाला कोई नहीं है। ऐसा प्रतित हो रहा है जैसे कुछ दिन पहले शहर में सुनामी आई हो।  अंत में दीपावली की ढेरसारी शुभकामनाएं और बधाईयां। दीपावली में आप दीप की तरह जलें और पूरे जग को अंधकर से उजाले की ओर ले जाएं।

देश में लहराता भगवा।

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देश में लहराता भगवा। हवा के तेज क्षोंके,आग की चिंगारी की लपटें और नभ में छाए काले बादल की तरह पूरे देश में भगवा रंग गहराता जा रहा है। ऐसा प्रतित हो रहा है जैसे कुछ ही समय में पूरे देश को अपने आगोश में ले लेगा भगवा। भगवा का रंग अब सभी रंगों को अपने में समेट रहा है। स्‍थ्‍ाानीय पार्टियां भगवा के सामने दम तोडती नजर अा रही है। हरियाणा और महाराष्‍ट्र की जीत ने इसके प्रभाव को और भी व्‍यापक कर दिया है। ।मोदी का मायाजाल। सरकार गठन के बाद पहली बार 9 राज्‍यों में भाजपा शासित सरकार,भ गवा को लहरा रहा है। मध्‍यप्रदेश,गुजरात, राजस्‍थान,छत्‍तीसगढ, गोवा,महाराष्‍ट्र,हरियाणा,आध्रं प्रदेश और पंजाब में गठबंधन की सरकार है। ।राहुल की करारी हार। ढाई साल में लोकसभा समेत 16 राज्‍यों में चुनाव हुए। 11 में कांग्रेस हारी। पांच राज्‍यों में सरकार गई और लोकसभा में औंधे मुंह गिरे। कह सकते हैं कि मोदी के मायाजाल में पूरी तरह से फंस गई है कांग्रेसी टीम। कांगेस के सफाई के साथ साथ स्‍थानीय दलों का भी सफाया हो रहा है। भगवा का रंग कोई भी हो? इसपे कितना भी दाग क्‍यों न हो? लेकिन यह सबको अपने रंग...

हम तुम्‍हारे हैं सनम

हम तुम्‍हारे हैं सनम मैं अपनी श्रीमती जी से बहुत प्‍यार करता हूं। उसे जीवन में व सारा कुछ देना चाहता हूं जिसकी उसे चाहत है। उसे जीवन में हमेशा बहुत खुश देखना चाहता हूं। पर बदकिस्‍मती कहें व थोडा दूसरे तरह की खुशी और प्‍यार पाना चाहती है।  जीवन के सफर में आगे बढना है तो आपको बहुत सारे कार्य करने होते हैं। इस तरह के सारे कार्य मेरी श्रीमतीजी को नागवर गुजरती है। अब मैं आपको उनकी खुशी वाली बातें बता देता हूं। सुबह दन्‍त मंजन एक साथ करें, चाय एक साथ हो, नाशता एक दूसरे को प्‍यार से खिलाएं, बाइक पे खाली जगह छोडकर सट कर बैठना, पार्टी में हाथ पकडकर चलना, ड्रेस उनके पसंद का पहनना, दिन का खाना मेरे पसंद का हो या न हो रात का खाना उनके पसंद का हो, फिर साथ में खाना, कभी कभी साथ में गाना गाना, घर से बाहर निकलने से पहले ही जल्‍दी आने का न्‍योता देना, बाहर निकलते ही हाथ थाम कर चलना जैसे मैं उसे छोडकर कहीं भागने वाला हूं। अब उसको कौन समक्षाए की दिनभर यही करूंगा तो काम कौन देखेगा। बार बार दुहराता हूं हम तुम्‍हारे हैं सनम फिर भी नहीं मानती। व्‍यापार घाटे में जा रहा है। मामला थोडा पेचीदा और उ...

शिक्षक दिवस

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आज देश के सभी स्‍कूलों,कॉलेजों में भारत के प्रथम उपराष्‍ट्रपति और देश के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाएगा। कहा जाता है कि शिक्षक राष्‍ट्र निर्माण, समाज निर्माण और युग प्रवर्तक होता है। वर्तमान समय में आधुनिक शिक्षा की बढती महत्‍ता ने शिक्षा को भी राजनीति का अखाडा बना दिया है। भारत की पूरी शिक्षा व्‍यवस्‍था किसी शिक्षक के पास नहीं बल्कि किसी  व्‍यवसायी के पास होता है।  भारत में गुरू शिष्‍य परंपरा आदिकाल से रही है। कहा जाता है कि गुरू बिना ज्ञान अधुरा होता है। गुरू की प्रासांगिकता भी आधुनिकता के दौर में बदलती जा रही है। अब पढाने वाले लोगों की इज्‍जत कम और नेता गुरू की इज्‍जत ज्‍यादा होती है क्‍योंकि उसकी सियासी पकड ज्‍यादा होती है। सियासी पकड के सामने वर्तमान समय की शिक्षा व्‍यवस्‍था कमजोर हो गई है। माना जाता है कि पढाई में कम भी हों तो चलेगा लेकिन सियासी चाल में ताश के पत्‍ते की तरह सिर्फ गुलाम और एक्‍का आना चाहिए। अगर आपमें ये तमाम खूबियां है तो आप भारत गुरू नहीं बल्कि विश्‍व गुरू हैं।  मैं अपने सभी शिक्...

राजनीति और पूंजीवादी व्‍यवस्‍था के मायने

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राजनीति और पूंजीवादी व्‍यवस्‍था दोनों के मायने पूरी तरह से अलग हैं। राजनीति जहां राज करने को तत्‍पर रहती है वहीं पूंजीवादी व्‍यवस्‍था पूंजी के माध्‍यम से गुलामी की डोर को बांध कर रखती है। अगर आप गौर से अध्‍ययन करें तो यह पाते हैं कि दोनों  का अर्थ समान है क्‍योंकि पूंजीपति पूंजी के माध्‍यम से शोषण करता है और राजनीति करने वाले आपके बीच रहकर आपका शोषण करता है। कहा जाता है कि जब सामांतवाद को उखाड फेंका गया था तो स्‍वतंत्र पूंजीवादी समाज का उदय हुआ था। उसी वक्‍त यह जाहिर हो गया था कि इस स्‍वतंत्रता का मतलब मेहनतकशों का उत्‍पीडन और शोषण की नई व्‍यवस्‍था का आगमन हो रहा है। शुरूआती समाज ने इस व्‍यवस्‍था की आलोचना की,उसकी भर्त्‍सना की,इसके विनाश का सपना देखा लेकिन काफी प्रयास के बाद भी इसे रोक नहीं सका। जिसका परिणाम आज देख रहे हैं। आज का मोदी युग पूरी तरह से पूंजीवादी युग है। इसमें जिसके पास पूंजी है उसका विकास होगा। बांकी बचे लोग गरीबी की मार से त्रस्‍त हो जाएंगे। आप मेट्राे में सवारी करने का सपना देख रहे हैं तो यह सही है लेकिन भारत की 90 प्रतिशत आबादी मैट्रो सेवा से दूर रह जाएगी...

मैं हूं अवसरवादी।

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धर्मवादी,जातिवादी,दलितवादी,स्वर्णवादी,पूंजीवादी, भाजपा, कांग्रेस, मुलायम, लालू और एक खेमा है अवसरवादी का। सोशल मीडिया से लेकर प्रकाशन और प्रसारण मीडिया तक इसका प्रभाव आसानी से देखा जा सकता है। सभी अपने अपने हक की लडाई लड  रहे हैं। देश के किसी भी मुद्धे को ये अपने अपेने नजरिए से देखते हैं। और तर्क भी इतना मजबूत की कुछ समय के लिए सही और गलत का फर्क समझ न आए। जिस देश में इतने वादी और नजरिए वाले लोग होंगे, उनका चश्‍मा उनके धर्म,जाति,स्‍वर्ण,दलित,भाजपा और कांग्रेस के नजरिए से देखता और बोलता है। इसमें कौन सा वादी भारतीय विकास की बात करता है। भारतीय गरीबों के लिए रोटी,कपडा और मकान की बात करता है यह मेरे समझ से बाहर है। कहा जाय तो गलत नहीं होगा कि अंधो के देश में आईना बेचता हूं। सभी वादी के उपर बैठे लोग मलाई खा रहे हैं और जनता बिना पीछे कलई किए हुए शिशे में अपना चेहरा देख रही है। जिसेमें कुछ दिखाई नहीं पड रहा है। ये सभी का विकास नहीं बल्कि अपना विकास और बिस्‍तार कर रहे हैं।
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महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिन्‍दी विश्‍वविद्यालय के संचार एवं मीडिया अध्‍ययन केंद्र के जूनियर छात्रों को संबोधित करते हुए।
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Niranjan Kumar