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Niranjan Kumar

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सत्ता की चाल पर कलम का नृत्य

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फेसबुक पर लिखने पढने वाले वर्ग में कुछ ज्यादा ही समझदार लोग हैं। आजादी के 67 साल के बाद भी सत्ता की मलाई खाने के फेरे में पढे लिखे समझदार लोगों को आज भी पता नहीं है कि उसका पलडा किस और है। सिक्के की उछाल में ह ेड या टेल होता है। लेकिन फेसबुक पर ज्यादा समझदार लोग हेड को भी अपने पक्ष में और टेल को भी अपने पक्ष में मानते हैं। दोनों मामलों को अपने हित के हिसाब से देखते हैं और सोचते हैं किसमें कितना फायदा है। भारत में शुरूआत से ही फायदे और घाटे की राजनीति के हिसाब से लोगों में बदलाव होता रहा है। लेकिन कलम की धार हमेशा किसी पार्टी या संस्थान के पक्ष या विपक्ष में चली है। वर्तमान समय में कलम की धार कुंद तो हुई ही है साथ ही कलम का वार भी धारदार नहीं रहा। कलम चलाने वाले लेखक सत्ता की चाल पर थिरकते हैं। पूरे देश को ज्ञान का पाठ पढाने वाले प्रोफेसर और देश के बडे पत्रकार जो सभी आमजन को रात में भी आईना दिखाने का काम करते हैं को 16वें लोकसभा चुनाव में भी ये पता नहीं है कि वे किस और हैं। कई लोग तो सत्ता की चाल पर कलम को नृत्‍य करवा रहे हैं। पत्रकार या प्रोफेसर महोदय से मेरा आग्रह है ...

अपना बहुमूल्‍य वोट दो और लोकतंत्र को लूटोतंत्र बनाओ।

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देश में 16वें लोकतंत्र का पर्व लोकसभा चुनाव अब समाप्ति की अौर बढ रहा है। इससे पहले हमने 15 बार लोकसभा का चुनाव किया अौर अपने अपने उम्मीदवार को जीता कर गांव की गली से संसद तक पहुंचाया। ज िसको गांव से संसद तक पहुंचाया वह उम्मीदवार गांव छोडकर शहर की अौर चल दिया। हरबार की तरह इस बार भी महांपर्व में आमजनता अपना बहुमूल्य‍ वोट देकर लोकतंत्र को मजबूत कर रही है। उम्मीदवारों का चयन जाती,धर्म,समप्रदाय के आधार पर हो रहा है, वोट का प्रतिशत बढाकर लोकतंत्र को मजबूत कर रहे हैं, चुनावों में पार्टियों के द्रारा कुछ कर गुजरने की बात हो तो बिना नल के पानी लाने की बात, बिना सेक्स के बच्चे पैदा करना, अब पुरूष भी करेगा बच्चा पैदा, सभी परिवार को निशुल्क सालाना 25-25 लाख बिना काम किए हुए मिलेंगे, घर के सारे कामकाज के लिए रॉवर्ट की व्यवस्था प्रत्येक परिवार को सिर्फ पांच रूपए में, अब महिलाआें को आराम ही आराम इत्यादी और भी कई दावे हैं जो प्रत्येक चुनाव की तरह इसबार भी किया जा रहा है। लोकतंत्र के मुर्ख हमसभी मतदाता इस बार भी गुमराह होकर अपने मत को अधिकार समझकर किसी न किसी को अपना वोट दिया। सवाल वोट देने ...

मीडिया और राजनीति का रंग।

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होली का रंग आसानी से एक दो दिन में छुट जाता है, राजनीति का रंग राजनीति के समय चढता है और उतर जाता है, अपने चरित्र पर चढा रंग बर्षों नहीं उतरता है और वर्षों लगने के बाद चढता है। सभी लोग किसी न किसी रंग में रंगना ज रूर पसंद करता है। रंग काला ही क्‍यों न हो रंगना सब कोई चाहता है। काला रंग अंधकार का प्रतिक माना जाता है लेकिन इसका भी अपना अलग मजा है। काले का आस्तित्‍व सफेद पर टिका होता है। सामान्‍यत: माना जाता है कि काला रंग शुभ नहीं होता है लेकिन काली कमाई को कभी भी अशुभ नहीं माना जाता है। ।काला का अपना आकर्षण एवं महत्‍व है। फिर चाहे काला धन हो या काली कमाई इसका आकषर्ण और महत्‍व सबसे अलग होता है। आज मीडिया भी बाजार का रूप ले चुका है ऐसे में हर कोई बोली लगा रहा है। दूसरे को धटिया बताकर अपने को उत्‍कृष्‍ट बता रहा है। आम जनता और जनजनहित के मुद्धे तो काेसों पीछे छुट गए हैं। प्रिंट मीडिया हो या इलक्‍ट्रानिक मीडिया दिन भर मोदी, राहूल और केजरीवाल जी की प्रतिभा दिखाने में लगा है जैसे आज तक इन तीनों के अलावा कोई नेता पैदा लिया ही न हो। समय है, टेलीविजन चैनलों के टीआरपी की समाचार पत्र के प्र...

बलात्‍कार न करने की सलाह सपा सुप्रिमो मुलायम सिंह का कथन।

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बलात्‍कार आज के समझदार युवा गलती से कर देते हैं। उन्‍हें सम्‍मान देना चाहिए। फांसी नहीं देना चाहिए। आगे से उसे दूसरा बलात्‍कार न करने की सलाह देकर छोड देना चाहिए। दो बलात्‍कार में शामिल युवकों को समझाकर और तीसरे बलात्‍कर में उसके मां बाप को  बता देना चाहिए। यह देश हित में हैं। इससे देश तरक्‍की करेगा। जनसंख्‍या में बृद्धि होगी। जल्‍द ही भारत चीन को पीछे छोडकर विश्‍व में सबसे ज्‍यादा जनसंख्‍या वाला देश बन जाएगा। जनता को सोचना होगा कि अगर बलात्‍कार भारत में बंद हो जाएगा तो देश की जनसंख्‍या कैसे बढेगी। इस पर विचार करना चाहिए। कुछ यही दर्शा रहा है उत्‍तरप्रदेश के सपा सुप्रिमो मुलायम सिंह का कथन। मानना होगा बहुत ही उंच्‍च विचार रखते हैं। दिल खुला हुआ है। काश देश में हो रहे बलात्‍कार की धटनाओं में से कभी ये मौका इन नेताओं के परिवार में किसी के साथ हो। उस दिन पता चल जाएगा कि बलात्‍कार में शामिल लोगों को फांसी या सम्‍मान देकर विदा करना चाहिए। इस तरह की अप्रिय घटना ईश्‍वर न करे किसी के साथ हो लेकिन जब तक कुछ लोगों के साथ घटना घटित न हो जाए तब तक उसका दर्द उसे समझ नहीं आता है।

भीमराव अम्वेडकर

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   14 अप्रैल 1891, आज ही के दिन डॉ. भीमराव अम्वेडकर ने जन्म लिया था। आज पूरे देश में अम्वेड कर जयंती मनाई जा रही है। लोगों में खुशी की लहर है। बाबा साहेब ने पूरे देश को एक नई धारा में जोडने का काम किया है। बाबा साहब को दार्शनिक, राजनीतिक, इतिहासकार, अर्थशास्त्री आदी कई नामों से देश और विदेशों में जाना जाता है। अम्वेडकर जैसे महापुरूषों के विचारों से मनुष्य के जीवन में नई उर्जा का संचार होता है। यह संचार पूरे शरीर को मजबूती प्रदान करता है। अम्वेडकर जी ने देश को सम्बोधित करते करते हुए कहा था कि तुम्हीं भारत के मूलनिवासी और सहोदर भाई हो। कोई किसी से छोटा और बडा नहीं है। आज भी बाबा साहब के उच्य विचार हमारे बीच है। आप उनके विचारों के साधक बनें। मैं अपनी और से बाबा साहब की जयंती की ढेरसारी बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। बाबा साहब को अपने बीच पाने के लिए, देखने के लिए उनके विचारों और अनमोल वचन को आदर्श के रूप में अपनाएं।

सत्‍ता से दूर होती दिख रही भाजपा।

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     सत्‍ता से दूर होती दिख रही भाजपा। भारत में कांग्रेस का इतिहास स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास के साथ जुड़ा हुआ है। इसका गठन 8 दिसम्बर1885 में हुआ। भारत के राजनीतिक पटल पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उदय का इतिहास आज़ादी के पूर्व में जाता है,  जब वर्ष 1925 में डॉक्टर हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) का गठन किया। राजनीतिक स्थिति को देखते हुए संघ परिवार ने राजनीतिक शाखा के तौर पर वर्ष 1951 में भारतीय जन संघ का गठन किया। देश के प्रथम चुनाव में इस पार्टी को राष्‍ट्रीय पार्टी का दर्जा प्रदान किया गया। अब गौर करें तो हम पाते हैं कि कांग्रेस के पास 125 साल से ज्‍यादा का राजनीतिक अनुभव वहीं भाजपा,संध के पास 85 साल का अनुभव अपने आप में कई दशक को समेटे हुए है। जो यह दर्शाता है कि भारत की राष्‍ट्रीय पार्टियां अब तक भारत और इंडिया के फर्क को आसानी से समझने लगी है। हरबार की तरह इस बार भी 16वीं लोकसभा चुनाव में विकास का मुद्धा राजनीतिक पार्टियों के लिए सबसे उपर है। क्‍या विकास का पैमान सिर्फ चुनाव तक सिमित है या चुनाव जितने तक? कांग्रेस अब तक महंगाई,...